Karva Chauth Puja Ki Tayari
पूजन की तैयारी
श्री गणेश
सुपारी पर मौलि गोलाकार में इस तरह लपेटे की सुपारी पूर्णतः ढक जाए! एक कटोरी या अन्ये छोटा पात्र रखे! इस अक्षत पर गणेश रूप मौलि को रखे!
माँ अम्बिका गौरी
पीली मिट्टी की गोरा बनाये! मिट्टी गोलाकार करके ऊपरी सतह पर मिट्टी का त्रिकोण बनाये! मिट्टी उपलब्द ना होने पर एक तांबे के सिक्के पर रक्षासूत्र लपेटे एंव एक छोटे से लाल कपडे से ढक दे! एक रोली की बिन्दी लगाये एंव बनी हुई बिन्दी लगाये! भाव ये रखे की माँ गौरी का सुख है! अम्बिका गौरी के सवरूप को श्रद्धा पूर्वक गणेशजी के बगल में बायी और रखे!
श्री नन्दीश्वर
एक पुष्प को श्री नन्दीश्वर का सवरूप मान कर स्थान दे!
श्री कार्तिकेय
एक पुष्प को श्री कार्तिकेय का सवरूप मान कर स्थान दे! श्री नन्दीश्वर एंव श्री कार्तिकेय का चित्र हो तो उतम है! पुष्प स्वरूप रखा हो तो गणेश और गोर के समीप दूसरे पात्र में अक्षत के ऊपर रखें!
श्री शंकरजी
प्रमुख देवता श्री शिवजी के शिवलिंग का चित्र गणेश गोरा नन्दीश्वर के पीछे आँखें!
श्री पार्वतीजी
हल्दी वा आटे के मिश्रण को पानी डाल कर खोल तैयार करे! यह ऐपन कहलाता है! इससे किसी गते पर पारवती जी का चित्र बनायें! चित्र में आभूषण पहनाने के लिए कील लगाये! जैसे कंठ में माला के लिए कील लगायी वैसे कंठ के दायें बायें कील लगायें! चरणो में पायल पहनाने के लिए दोनों चरणो के दोनों और कील लगायें! माँ के चरणो की भक्तिपूर्वक पूजन करें!
करवा
मिट्टी तांबे पीतल अथवा चांदी के 2 करवा! करवा ना हो तो 2 लोटा! करवा में रक्षासूत्र बंधे! ऐपन से स्वस्तिक बनायें! दोनों करवो में कंठ तक जल भरें! या एक करवा में दुग्ध अथवा जल भरें! एक करवा में मेवा जो सांस को दिया जाता है! दुग्ध अथवा जल से भरे करवे में तांबे या चांदी का सिक्का डालें!
पूजा सामग्री
दूप, दीप, कपूर, रोली, चन्दन, सिंदूर, काजल इत्यादि पूजन सामग्री थाली में दाहिनी और रखें! दीपक में घी इतना हो की सम्पूण पूजन तक डीपक प्रज्वलित रहे
नैवेध
नैवेध में पूर्ण फल, सुखा मेवा अथवा मिठाई हो! प्रसाद एव विविध व्यंजन थाली में सजा कर रखें! गणेश, गोरा, नंदी, कार्तिकेय और श्रीशिवजी के लिए नैवेध तीन जगह अलग अलग छोटे पात्र में रखें!
जल के लिए 2 पात्र
- आचमन के जल के लिए छोटे पात्र में जल भर कर रखें! साथ में एक चम्मच भी रखें!
- हाथ धोने का पानी इसमें रिक्त पात्र में गिरायें
- विनियोग के पानी के लिए बड़ा पात्र जल भर कर रखें
पुष्प
पुष्प एव पुष्पमाला थाली में दाहिनी और रखें!
चन्द्रमा
चन्द्रदेव या चन्द्रमा का चित्र स्वये के दाहिनी और स्थापित करें! सब तैयारिया हो जाने पर कथा सुने और फिर चन्द्रमा के निकलते ही श्री चन्द्रदेव को अर्क देकर भोजन ग्रहण करें!
Karva Chauth Puja Ki Tayari










